पाकिस्तान में जैश नेटवर्क को बड़ा झटका, मसूद अजहर का करीबी कमांडर ढेर

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written by Shikha B

शिखा भंडारी
दिल्ली ।

पाकिस्तान में जैश नेटवर्क को बड़ा झटका, मसूद अजहर का करीबी कमांडर ढेर

आतंकी ढांचे में दरार या अंदरूनी जंग? सलमान अजहर की मौत से उठे बड़े सवाल

पाकिस्तान में आतंकी संगठनों पर लगातार हो रही कार्रवाइयों के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के करीबी और संगठन के अहम कमांडर सलमान अजहर के मारे जाने की खबर सामने आई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान के भीतर ही आतंकी नेटवर्क पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान अजहर लंबे समय से जैश-ए-मोहम्मद के लिए सक्रिय था और संगठन की कई गतिविधियों में उसकी अहम भूमिका मानी जाती थी। उसे मसूद अजहर का भरोसेमंद सहयोगी बताया जाता था, जो न केवल आतंकी ऑपरेशन बल्कि संगठन के विस्तार और नेटवर्क को मजबूत करने में भी शामिल था। उसकी मौत को जैश के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि सलमान अजहर की मौत एक हमले में हुई, हालांकि इस हमले की पूरी जिम्मेदारी किसने ली है, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। पाकिस्तान के भीतर पिछले कुछ समय से कई आतंकी संगठनों के सदस्यों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि देश के अंदर ही आतंकी ढांचे में दरारें पड़ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाएं केवल अलग-अलग हमले नहीं हैं, बल्कि एक बड़े बदलाव का संकेत हो सकती हैं। पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव में रहा है कि वह अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे। ऐसे में इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि या तो आंतरिक संघर्ष बढ़ रहा है या फिर किसी स्तर पर लक्षित अभियान चलाया जा रहा है।

सलमान अजहर की भूमिका को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के बीच पहले से ही गंभीर चिंताएं थीं। माना जाता है कि वह कई आतंकी साजिशों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम तक पहुंचाने में शामिल रहा था। उसकी मौत से जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को अस्थायी झटका जरूर लगेगा, लेकिन यह भी सच है कि ऐसे संगठन अक्सर नए चेहरों के साथ खुद को फिर से खड़ा कर लेते हैं।

पाकिस्तान में हाल के महीनों में जिस तरह से आतंकी संगठनों के खिलाफ घटनाएं बढ़ी हैं, उसे “अंदरूनी सफाई” या “छुपा हुआ संघर्ष” भी कहा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह आपसी गैंगवार का नतीजा हो सकता है, जबकि कुछ इसे खुफिया एजेंसियों की रणनीतिक कार्रवाई मानते हैं।

इस घटना के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों के लिए जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन लंबे समय से खतरा बने हुए हैं। ऐसे में उसके शीर्ष नेतृत्व के करीबी लोगों का खत्म होना सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

फिलहाल पाकिस्तान सरकार या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इतना तय है कि सलमान अजहर की मौत ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय आतंकी नेटवर्क अब खुद भी अस्थिरता का शिकार हो रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस तरह की घटनाएं आतंकी संगठनों को कमजोर करती हैं या फिर वे नए रूप में और ज्यादा खतरनाक होकर सामने आते हैं।

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