नाबालिग को जबरन मां नहीं बनाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

Written by Desk Reporter (Delhi)
नाबालिग को जबरन मां नहीं बनाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
रेप पीड़िता के गर्भपात पर AIIMS की आपत्ति को ठुकराया
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और संवेदनशील मामले में साफ कर दिया है कि किसी नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के खिलाफ मां बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि एक बच्ची की उम्र पढ़ाई और भविष्य बनाने की होती है, न कि उसे गर्भ का बोझ उठाने के लिए बाध्य किया जाए।
यह मामला एक नाबालिग रेप पीड़िता से जुड़ा है, जो गर्भवती हो गई थी और गर्भ काफी आगे बढ़ चुका था। परिवार ने अदालत से गर्भपात की अनुमति मांगी। मेडिकल नियमों के अनुसार इतने समय के बाद गर्भपात करना आसान नहीं होता, इसलिए मामला अदालत तक पहुंचा।
सुनवाई के दौरान डॉक्टरों की एक टीम ने बताया कि गर्भपात में जोखिम हो सकता है और बच्चा जीवित भी पैदा हो सकता है। इसी आधार पर AIIMS ने फैसले पर आपत्ति जताई और पुनर्विचार की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि इस मामले में सबसे जरूरी पीड़िता का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य है। अगर उसे जबरन गर्भ जारी रखने को कहा जाता है, तो यह उसके अधिकारों का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेप पीड़िता के साथ पहले ही गंभीर अन्याय हो चुका है, ऐसे में उसे और तकलीफ देना सही नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि हर महिला को अपने शरीर और जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। यह अधिकार नाबालिगों पर भी लागू होता है, खासकर तब जब मामला यौन शोषण का हो।
इस फैसले के जरिए अदालत ने एक मजबूत संदेश दिया है कि कानून को संवेदनशील होना चाहिए और पीड़ित के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। सिर्फ नियमों का पालन करना ही काफी नहीं, बल्कि इंसाफ और इंसानियत भी उतनी ही जरूरी है।
