कांग्रेस ने कसी कमर , चुनाव में यूथ करता है बूथ को मजबूत !

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Written by Sudhir Sharma

दिल्ली में यूपी कांग्रेस की अहम बैठक आयोजित
कांग्रेस कोर कमेटी ने चुनावी रणनीति पर किया मंथन

दिल्ली में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की एक अहम बैठक ऐसे समय में हुई जब महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत गरम है। लोकसभा में बिल पास न हो पाने के बाद पार्टी ने स्थिति का आकलन करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए कोर कमेटी की बैठक बुलाई। यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जमीनी तैयारी, संगठन की मजबूती और जनता तक पहुंच बनाने के तरीकों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक का आयोजन कांग्रेस सांसद राकेश राठौर के आवास पर किया गया, जहां पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, सांसद और विधायक मौजूद रहे।

बैठक में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर रहा कि महिला आरक्षण बिल को लेकर जो राजनीतिक माहौल बना है, उसे पार्टी किस तरह जनता के बीच ले जाए। नेताओं का मानना था कि यह मुद्दा सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आम लोगों, खासकर महिलाओं तक पहुंचाना जरूरी है। इस बात पर चर्चा हुई कि गांव-गांव और शहर-शहर जाकर महिलाओं से सीधे संवाद किया जाए, ताकि उन्हें यह समझाया जा सके कि इस बिल का असली असर क्या होता और क्यों यह मुद्दा महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी रणनीति तैयार की गई। बैठक में यह माना गया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनाव जीतने के लिए सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियां काफी नहीं होतीं, बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए तय किया गया कि हर क्षेत्र में स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाए और उन्हें स्पष्ट जिम्मेदारियां दी जाएं। पार्टी यह भी चाहती है कि युवा और महिला कार्यकर्ताओं को ज्यादा मौका मिले, ताकि संगठन में नई ऊर्जा आए और जमीनी पकड़ मजबूत हो सके।

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि कांग्रेस को अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल करना होगा। एक तरफ जनसभाएं, पदयात्राएं और घर-घर संपर्क अभियान चलाने की बात हुई, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी अपनी बात को प्रभावी तरीके से रखने पर जोर दिया गया। नेताओं का मानना था कि आज के दौर में अगर डिजिटल माध्यमों का सही इस्तेमाल किया जाए, तो कम समय में ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सकता है।

महिला आरक्षण बिल को लेकर पार्टी के भीतर यह भावना भी सामने आई कि इस मुद्दे को भावनात्मक और सामाजिक दोनों स्तर पर उठाया जाना चाहिए। चर्चा में यह बात आई कि महिलाओं को सिर्फ राजनीतिक अधिकार देने की बात नहीं है, बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाने की जरूरत है। इसलिए पार्टी इस मुद्दे को एक व्यापक अभियान के रूप में चलाने की तैयारी कर रही है, जिसमें महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को भी जोड़ा जाएगा।

बैठक के दौरान नेताओं ने यह भी माना कि पार्टी को पिछले चुनावों से सीख लेने की जरूरत है। कई क्षेत्रों में संगठन की कमजोरी और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता को लेकर चिंता जताई गई। इस पर सहमति बनी कि इस बार चुनाव से पहले ही हर स्तर पर समीक्षा की जाएगी और जहां भी कमी नजर आएगी, उसे तुरंत ठीक करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही, यह भी तय किया गया कि उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय समीकरण और कार्यकर्ताओं की राय को ज्यादा महत्व दिया जाएगा।

बैठक खत्म होने के बाद सभी सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो गए। उनके सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि वे बैठक में तय की गई रणनीति को जमीन पर लागू करें। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि अगर सभी नेता और कार्यकर्ता मिलकर एकजुट तरीके से काम करें, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, दिल्ली में हुई यह बैठक कांग्रेस के लिए सिर्फ एक नियमित राजनीतिक गतिविधि नहीं थी, बल्कि एक नई शुरुआत की तरह देखी जा रही है। महिला आरक्षण बिल जैसे बड़े मुद्दे को केंद्र में रखकर पार्टी ने अपनी रणनीति को नया रूप देने की कोशिश की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति जमीन पर कितना असर दिखा पाती है और क्या कांग्रेस उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी स्थिति को मजबूत कर पाती है या नहीं।

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