महिला एकता तोड़ने की कोशिश : अखिलेश यादव

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written by Sudhir Sharma

महिला एकता तोड़ने की कोशिश , अखिलेश ने बिल को बताया राजनीतिक चाल

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उनकी भाषा सीधी और आक्रामक थी, जिसमें उन्होंने इस पूरे मुद्दे को सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि राजनीति की बड़ी चाल बताया। अखिलेश ने साफ कहा कि महिला आरक्षण बिल को जिस तरीके से पेश और आगे बढ़ाया गया, उसमें कई ऐसी बातें थीं जो महिलाओं के असली हक को मजबूत करने के बजाय राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश लगती हैं।

दरअसल अखिलेश यादव ने कहा कि अगर इस बिल को लेकर सही मंशा होती, तो इसे लागू करने में इतनी देरी और शर्तें नहीं जोड़ी जातीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने महिला आरक्षण के नाम पर एक ऐसा माहौल बनाया, जिससे लगे कि वह महिलाओं के पक्ष में खड़ी है, लेकिन असल में यह एक राजनीतिक षड्यंत्र था। उनके मुताबिक, इस बिल को ऐसे समय और तरीके से लाया गया, जिससे समाज के अलग-अलग वर्गों में भ्रम पैदा हो और असली मुद्दे पीछे छूट जाएं।

वही प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण बिल की असली हार दरअसल बीजेपी की हार है। उनका तर्क था कि जब कोई सरकार किसी बड़े सामाजिक मुद्दे को सही तरीके से लागू नहीं कर पाती या उसमें स्पष्टता नहीं रखती, तो उसका असर सीधे उसकी विश्वसनीयता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पहले से ज्यादा जागरूक हैं और वे सिर्फ घोषणा से संतुष्ट नहीं होतीं, बल्कि जमीन पर उसका असर देखना चाहती हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस मुद्दे पर महिलाओं की एकता को तोड़ने की कोशिश की। अखिलेश के अनुसार, समाज के अलग-अलग वर्गों खासकर पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं को बराबरी का लाभ नहीं मिलने की आशंका है। उनका कहना था कि अगर आरक्षण में सभी वर्गों का संतुलन नहीं रखा गया, तो यह बिल अपने मूल उद्देश्य से भटक जाएगा। इसी बात को लेकर उन्होंने जोर दिया कि सिर्फ महिला आरक्षण कह देना काफी नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि किस वर्ग की महिलाओं को कितना फायदा मिलेगा।

हालांकि अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी इशारा किया कि बीजेपी अक्सर बड़े-बड़े फैसलों को प्रचार के जरिए मजबूत दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन जब उनकी बारी आती है, तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल भी उसी तरह का एक उदाहरण बनता जा रहा है, जहां ज्यादा जोर राजनीतिक संदेश देने पर है और कम ध्यान असल लागू करने पर। उन्होंने इसे एक इमेज बनाने की राजनीति करार दिया।

वही उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में रही है और आगे भी रहेगी। उनका कहना था कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं होता, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती जैसे पहलुओं पर भी काम करना जरूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर सरकार सच में महिलाओं के हित में काम करना चाहती है, तो उसे हर वर्ग की महिलाओं को साथ लेकर चलना होगा, न कि सिर्फ एक वर्ग को फायदा पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए।

इस पूरे बयान के जरिए अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है। हालांकि, उनकी बातों में साफ तौर पर बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक संदेश भी नजर आया। यह भी साफ है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण का मुद्दा सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी राजनीति में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
कुल मिलाकर, यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सिर्फ एक बयान नहीं थी, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी थी। अखिलेश यादव ने जहां बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाए, वहीं महिलाओं के अधिकारों को लेकर अपनी पार्टी का रुख भी साफ किया। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मुद्दे पर आगे क्या राजनीतिक माहौल बनता है और क्या सच में यह बहस महिलाओं के हित में कोई ठोस बदलाव ला पाती है या फिर यह सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाती है।

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