कड़ी शर्तों पर अड़ा ईरान, क्या थमेगा मिडिल ईस्ट का महासंग्राम?

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सैयद समीना उवैस

मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब एक बड़े युद्ध का रूप ले चुका है और Iran, Israel तथा United States के बीच बढ़ती टकराहट ने हालात को और गंभीर बना दिया है, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संघर्ष कैसे रुकेगा और शांति की शुरुआत कहां से होगी।
ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह बिना शर्त बातचीत के लिए तैयार नहीं है और उसका कहना है कि सबसे पहले युद्ध पूरी तरह खत्म होना चाहिए, जब तक हमले जारी रहेंगे तब तक कोई बातचीत मायने नहीं रखेगी, इसके साथ ही वह भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई न होने की ठोस गारंटी चाहता है ताकि दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो।
ईरान की एक और बड़ी मांग यह है कि इस युद्ध में उसे जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाए, उसका मानना है कि अगर उस पर हमला हुआ है तो उसकी कीमत भी चुकाई जानी चाहिए, इसलिए मुआवजे का मुद्दा उसके लिए बेहद अहम बन गया है।
रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा Strait of Hormuz को लेकर है, जहां ईरान अपनी मजबूत पकड़ चाहता है ताकि इस अहम समुद्री रास्ते पर उसका प्रभाव बना रहे और भविष्य में उस पर किसी तरह का दबाव न बनाया जा सके।
सैन्य ताकत के मामले में भी ईरान ने अपनी स्थिति साफ कर दी है, उसने अपने मिसाइल कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि इस पर किसी भी तरह की पाबंदी या समझौते के लिए वह तैयार नहीं है क्योंकि यह उसकी सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
इस बीच Donald Trump ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है, लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है, हालांकि Pakistan, Turkey और Egypt जैसे देशों के जरिए माहौल को समझने की कोशिश जरूर चल रही है ताकि आगे बातचीत का रास्ता निकल सके।
खबरें यह भी सामने आ रही हैं कि अगर हालात अनुकूल रहे तो बातचीत Islamabad में हो सकती है, जहां ईरान की तरफ से बड़े नेता शामिल हो सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला Islamic Revolutionary Guard Corps के हाथ में ही रहेगा जो देश की सैन्य रणनीति तय करता है।
अगर पूरे हालात को सीधे शब्दों में समझें तो शांति की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही है, क्योंकि ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है और दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल के लिए इन शर्तों को मानना आसान नहीं है, ऐसे में यह टकराव कब खत्म होगा यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन कितना झुकने को तैयार होता है, फिलहाल बातचीत की उम्मीद जरूर है लेकिन सख्त शर्तों और अविश्वास के कारण स्थिति अब भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

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