War Economy Explained: संकट के समय देश पैसा कैसे कमाते हैं? समझिए पूरा सिस्टम

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War Economy Explained: “जब देश संकट में होता है, तब वो गरीब नहीं होता, बल्कि सबसे ज्यादा कमाता है”। ये सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन पीछे की इतिहास और आज की दुनिया दोनों यही कहानी बताते हैं।

Written By Rishika Mishra

Rishika Mishra (Digital coordinator)

War Economy Explained: Russia-Ukraine War हो या Israel-Hamas War हमें टीवी पर क्या दिखता है? बम, तबाही, और बर्बादी। लेकिन इन सबके पीछे एक और दुनिया चल रही होती है , एक ऐसी दुनिया, जहां संकट एक बिज़नेस अपॉर्च्युनिटी बन जाता है।

जब संकट बना कमाई का मौका

जैसे 2019 के बाद जब Sri Lanka आर्थिक संकट में डूबा, उस वक्त देश के पास पैसे खत्म हो गए, इन्फ्लेशन बढ़ गया और लोग सड़कों पर उतर आए। ऐसे में एंट्री हुई ग्लोबल लेंडर्स की, जैसे International Monetary Fund (IMF)। हालांकि IMF ने लोन दिया, लेकिन अपनी शर्तों पर और वो शर्तें थी टैक्स बढ़ाओ, सब्सिडी हटाओ, सरकारी खर्च कम करो। अब सोचो, ऐसे में देश को राहत मिली या वो एक नए जाल में फंस गया ?

संकट का असली खेल

असल में संकट के समय तीन बड़े तरीके से पैसा बनता है।

Loan Trap (कर्ज का जाल)

जब कोई देश क्राइसिस में होता है, उस वक्त उसे तुरंत पैसे चाहिए होते हैं। वो लोन लेता है, लेकिन इंटरेस्ट और कंडीशन्स के साथ, और यहीं से शुरू होता है एक साइकल जहां देश धीरे-धीरे फाइनेंशियल कंट्रोल खो देता है।

War Industry (युद्ध = बिज़नेस)

Russia-Ukraine War के दौरान दुनिया ने सिर्फ मिसाइल और तबाही ही नहीं देखी, बल्कि एक और चीज़ चुपचाप बढ़ती रही आर्म्स इंडस्ट्री की डिमांड। जब युद्ध लंबा चलता है, तो देशों को लगातार हथियार, एम्युनिशन और डिफेंस सिस्टम्स की जरूरत पड़ती है। इसके लिए गवर्नमेंट्स बड़े-बड़े डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स साइन करती हैं। इसका सीधा फायदा प्राइवेट आर्म्स कंपनियों को मिलता है, और उनके प्रॉफिट्स भी तेजी से बढ़ते हैं। नए ऑर्डर्स आते हैं, प्रोडक्शन बढ़ता है। यानी जहां एक तरफ शहर तबाह हो रहे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ फैक्ट्रियां फुल कैपेसिटी पर चल रही होती हैं।

DATA: जो आपको नहीं बताया जाता

डेवलपिंग कंट्रीज़ हर साल ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में बिलियंस खो देती हैं, और क्राइसिस के समय रिच नेशन्स और इंस्टीट्यूशन्स ज्यादा फायदा उठाते हैं।

संकट में कैसे बनता है काला बाज़ार

युद्ध या किसी बड़े क्राइसिस के दौरान सबसे पहले असर पड़ता है जरूरी चीज़ों की सप्लाई पर जैसे ऑयल, गैस और फूड। जब सप्लाई चेन टूटती है, ट्रांसपोर्टेशन रुकता है और प्रोडक्शन कम हो जाता है, तो मार्केट में इन चीज़ों की कमी होने लगती है। यहीं से शुरू होता है एक हिडन गेम — ब्लैक मार्केट। अब ये सामान खुले मार्केट में नहीं, बल्कि पीछे के रास्तों से बेचा जाता है। कीमतें अचानक कई गुना बढ़ जाती हैं, और आम लोगों के लिए बेसिक जरूरतें भी महंगी हो जाती हैं।

असली सवाल क्या है?

अब सवाल ये नहीं है कि “कौन सा देश जीत रहा है?” बल्कि सवाल ये है कि “इस पूरे खेल में पैसा कौन कमा रहा है?”दुनिया के हर बड़े क्राइसिस में एक पैटर्न दिखता है कुछ देश टूटते हैं, और कुछ सिस्टम्स और मजबूत हो जाते हैं। क्योंकि सच ये है, कि युद्ध और संकट सिर्फ तबाही नहीं लाते वो एक इनविज़िबल इकोनॉमी भी बनाते हैं।

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