2003 की गलती का साया: इराक के बाद अब ईरान पर वही पुरानी कहानी?

सैयद समीना उवैस

2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने इराक पर हमला करते हुए कहा था कि वहां ऐसे खतरनाक हथियार छिपे हैं जो पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकते हैं। उस समय यह बात इतनी जोर-शोर से कही गई कि कई देशों ने भी इस पर भरोसा कर लिया और युद्ध शुरू हो गया।लेकिन बाद में जब सब कुछ खंगाला गया तो पता चला कि वहां वैसे हथियार थे ही नहीं। यानी जिस वजह से इतना बड़ा युद्ध हुआ, वही वजह ही गलत निकली। इस बात ने अमेरिका की साख को काफी नुकसान पहुंचाया और दुनिया भर में लोग उसकी नीतियों पर सवाल उठाने लगे।अब करीब 20 साल बाद ईरान को लेकर भी कुछ वैसा ही माहौल बनता दिख रहा है। अमेरिका बार-बार कहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि ईरान ने साल 2003 के बाद इस दिशा में अपने कदम काफी हद तक रोक दिए थे।इसके बावजूद ईरान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है—कभी आर्थिक प्रतिबंध लगाकर, तो कभी सैन्य ताकत दिखाकर। इससे पूरे मिडिल ईस्ट का माहौल तनावपूर्ण हो गया है और कभी भी बड़ा टकराव हो सकता है। इसका असर सिर्फ उस इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।सीधी बात ये है कि 2003 में जो गलती इराक के मामले में हुई थी, उसकी याद आज भी लोगों के दिमाग में है। इसलिए जब ईरान को लेकर ऐसी बातें होती हैं, तो लोग तुरंत उसी पुराने मामले से तुलना करने लगते हैं। फर्क बस इतना है कि नाम बदल गया है, लेकिन हालात और अंदाज़ काफी हद तक वही नजर आते हैं।

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