राजस्थान के कन्हैया लाल को बीजेपी ने भुला दिया?


Written by Sanjay Singh
राजस्थान के चर्चित कन्हैया लाल टेलर मर्डर केस को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला इसलिए गरमाया है, क्योंकि खुद कन्हैया लाल के परिवार ने न्याय में हो रही देरी पर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में अब जमकर सियासत भी शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर वार पलटवार कर रहे हैं।
कन्हैया लाल के बेटे यश साहू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर परिवार का दर्द सामने रखा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए बयान का जिक्र किया। उस समय अमित शाह ने कहा था कि अगर तत्कालीन सरकार स्पेशल कोर्ट बना देती, तो अब तक आरोपियों को सजा मिल चुकी होती।
अब परिवार ने उसी बयान को आधार बनाते हुए पूछा है कि जब राजस्थान और केंद्र, दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, तो फिर अब तक स्पेशल कोर्ट का गठन क्यों नहीं हुआ ? परिवार का कहना है कि न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है और आखिर उनके अपने को इंसाफ कब मिलेगा। परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि वे कब कन्हैया लाल की अस्थियों का गंगा में विसर्जन कर पाएंगे।
परिवार के इन सवालों के बाद राजनीति भी गरमा गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे को उठाते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर परिवार की पोस्ट और दर्द को साझा करते हुए कहा है कि कन्हैया लाल की हत्या जैसे संवेदनशील मामले पर राजनीति करने वाले लोग अब परिवार को न्याय कब दिलाएंगे।
वहीं, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने भी बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन अब तक परिवार को इंसाफ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सिर्फ इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है और परिवार के दर्द को समझने में नाकाम रही है।
दूसरी तरफ बीजेपी ने इन आरोपों पर सफाई दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि मामला न्यायपालिका के अधीन है और सरकार इसमें सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ है और कानून के तहत ही कार्रवाई हो रही है।
गौरतलब है कि जून 2022 में उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या ने पूरे देश को हिला दिया था। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मामले में न्याय कब मिलेगा और दोषियों को सजा कब सुनाई जाएगी।
