अंजनेय कुमार सिंह (IAS) – सत्ता, सिस्टम और फैसलों के बीच एक अफसर की असली कहानी

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written by Shikha B

आज हम आपको ऐसे आईएएस अफसर के बारे में बतानें जा रहे हैं जिनकी कार्यशैली की चर्चा मंडल और जिले तक सीमित न होकर देश भर में रहती है .

अंजनेय कुमार सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2005 बैच के अधिकारी हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान एक सख्त, निर्णायक और परिणाम देने वाले अधिकारी की पहचान बनाई। उनका मूल कैडर सिक्किम है, लेकिन उन्होंने उत्तर प्रदेश में ही लंबे समय तक कार्य करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी निभाई और वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के मंडल आयुक्त (कमिश्नर) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी कार्यशैली केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने प्रशासन को सक्रिय, जवाबदेह और प्रभावी बनाने का प्रयास किया। उनका नाम खासतौर पर तब चर्चा में आया जब उन्होंने रामपुर में जिलाधिकारी रहते हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। इसके अलावा उन्होंने मुरादाबाद मंडल में इतिहास, प्रशासनिक दस्तावेजों, शहरी विकास और कानून-व्यवस्था को लेकर भी कई महत्वपूर्ण काम किए, जिनका असर लंबे समय तक देखने को मिला।

आजम खान के खिलाफ कार्रवाई – सुर्खियों में आने की वजह: -अंजनेय कुमार सिंह का सबसे चर्चित और निर्णायक कदम रामपुर में जिलाधिकारी रहते हुए आजम खान के खिलाफ की गई कार्रवाई थी। रामपुर लंबे समय से आजम खान का राजनीतिक गढ़ माना जाता था, जहां उनका व्यापक प्रभाव था। ऐसे माहौल में किसी अधिकारी द्वारा उनके खिलाफ सख्त कदम उठाना आसान नहीं था। अंजनेय कुमार सिंह ने प्रशासनिक स्तर पर कई जांच शुरू करवाईं और आजम खान व उनके करीबियों के खिलाफ लगभग 60 से अधिक मुकदमे दर्ज कराए। इन मामलों में सरकारी जमीन पर कब्जा, दस्तावेजों में गड़बड़ी, सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग जैसे आरोप शामिल थे। यह कार्रवाई केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसे आगे बढ़ाकर कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचाया गया। 2019 के एक हेट स्पीच मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। इस मामले में अदालत से सजा हुई, जिसके परिणामस्वरूप आजम खान की विधायकी चली गई। यह घटना प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आई और अंजनेय कुमार सिंह को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ले आई। इसके अलावा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के मामले में भी जांच कराई गई। इसमें उम्र और दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं, जिसके आधार पर उनकी विधायकी रद्द कर दी गई। इन कार्रवाइयों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अंजनेय कुमार सिंह कानून के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करते।

मंडावर में ऐतिहासिक कार्य और विरासत संरक्षण :-अंजनेय कुमार सिंह की कार्यशैली का एक अलग पहलू यह भी रहा कि उन्होंने केवल प्रशासनिक नियंत्रण ही नहीं, बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को भी महत्व दिया। बिजनौर के मंडावर क्षेत्र में उन्होंने ऐतिहासिक स्थलों और स्थानीय इतिहास को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम किया। मंडावर क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन लंबे समय तक वहां के इतिहास और धरोहरों पर ध्यान नहीं दिया गया। अंजनेय कुमार सिंह ने इस दिशा में पहल करते हुए स्थानीय इतिहास को दस्तावेज़ी रूप देने और उसे प्रशासनिक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया।

मुरादाबाद गजेटियर – प्रशासनिक दस्तावेज में नई दृष्टि :-मुरादाबाद मंडल के मंडल आयुक्त के रूप में उन्होंने मुरादाबाद गजेटियर के पुनर्लेखन और विस्तार का कार्य किया। इसमें केवल पारंपरिक जानकारी ही नहीं, बल्कि आधुनिक विकास, औद्योगिक गतिविधियां, सामाजिक बदलाव और सांस्कृतिक विविधता को भी शामिल किया गया। मुरादाबाद के पीतल उद्योग को विशेष पहचान दी गई और पूरे मंडल की विशेषताओं को एक समग्र रूप में प्रस्तुत किया गया। यह प्रयास क्षेत्र की पहचान को मजबूत करने और भविष्य की योजनाओं के लिए आधार तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।

मुरादाबाद शहर का विकास और अतिक्रमण हटाओ अभियान:-मुरादाबाद मंडल में उनके कार्यकाल का एक बड़ा पहलू शहरी विकास रहा। शहर में लंबे समय से फैले अतिक्रमण को हटाने के लिए उन्होंने सख्त अभियान चलाया। सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से अवैध कब्जे हटाए गए, जिससे यातायात व्यवस्था सुधरी और शहर का स्वरूप बदला। इस अभियान के तहत कई जगहों पर चौड़ीकरण और पुनर्विकास का काम हुआ, जिससे मुरादाबाद शहर पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और विकसित नजर आने लगा।

महिलाओं के लिए पहल – पेट्रोल पंप पर सेनेटरी पैड व्यवस्था-:अंजनेय कुमार सिंह ने महिला सुविधाओं को भी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में शामिल किया। उनके कार्यकाल में पेट्रोल पंपों पर सेनेटरी पैड की व्यवस्था कराई गई,

संभल मस्जिद मामला – संतुलन और निष्पक्षता :-संभल में मस्जिद से जुड़े एक संवेदनशील मामले में उन्होंने संतुलित प्रशासनिक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने जल्दबाजी में कोई एकतरफा निर्णय लेने के बजाय जांच और सर्वे कराने का फैसला किया। इससे तथ्य सामने आए और अफवाहों पर नियंत्रण पाया गया। इस कदम ने विवाद को बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यशैली और सोच – क्यों अलग हैं अंजनेय कुमार सिंह :-अंजनेय कुमार सिंह की कार्यशैली उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती है। वे केवल आदेश देने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाले अधिकारी माने जाते हैं।

उनकी सोच के प्रमुख आधार हैं:

कानून के सामने सभी समान हैं

प्रशासन को राजनीतिक दबाव से मुक्त होना चाहिए

निर्णय समय पर और स्पष्ट होने चाहिए

विकास और व्यवस्था दोनों साथ-साथ चलने चाहिए

अंजनेय कुमार सिंह का पूरा प्रशासनिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक अधिकारी अगर मजबूत इरादों के साथ काम करे तो वह सिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है।

रामपुर में आजम खान के खिलाफ सख्त कार्रवाई से लेकर मुरादाबाद गजेटियर के माध्यम से इतिहास को नया रूप देने तक, मंडावर में ऐतिहासिक कार्यों से लेकर मुरादाबाद शहर के विकास और अतिक्रमण हटाने के अभियान तक—हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

इसके साथ ही महिलाओं के लिए पेट्रोल पंपों पर सेनेटरी पैड की व्यवस्था जैसी पहल यह दिखाती है कि उनकी सोच केवल सख्त प्रशासन तक सीमित नहीं थी, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता भी उसमें शामिल थी।

उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में बनी, जो कठिन परिस्थितियों में भी निर्णय लेने से नहीं डरता और जो प्रशासन को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे जमीन पर लागू करता है।

इसी कारण उनका नाम उत्तर प्रदेश के उन अधिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में प्रभाव छोड़ा और प्रशासन को एक नई दिशा देने का प्रयास किया।

समावेशी शिक्षा की पहल – दृष्टिबाधित बच्चों के लिए मॉडल लाइब्रेरी:-अंजनेय कुमार सिंह की प्रशासनिक सोच केवल व्यवस्था सुधार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने समाज के उन वर्गों पर भी विशेष ध्यान दिया जो अक्सर योजनाओं में पीछे छूट जाते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने दृष्टिबाधित दिव्यांग बच्चों के लिए एक मॉडल लाइब्रेरी विकसित करने की पहल की। यह लाइब्रेरी सिर्फ किताबों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसा सशक्त माध्यम है जहां विशेष बच्चों को ब्रेल लिपि, ऑडियो बुक्स और डिजिटल संसाधनों के जरिए शिक्षा से जोड़ा गया। इस पहल का उद्देश्य था—“समान अवसर” को व्यवहार में लागू करना।

ऐसे प्रयास यह दिखाते हैं कि प्रशासन अगर संवेदनशील हो, तो वह केवल नियम लागू करने वाला तंत्र नहीं रहता, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए सहारा बन सकता है।गांव -गांव लाइब्रेरी – ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश-अंजनेय कुमार सिंह ने शिक्षा को केवल स्कूलों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने “गांव-गांव लाइब्रेरी” की अवधारणा पर काम करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करने की दिशा में पहल की। इस योजना के पीछे स्पष्ट सोच थी—ग्रामीण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, सामान्य ज्ञान और समसामयिक विषयों से जोड़ना। जहां शहरों में संसाधनों की कमी नहीं होती, वहीं गांवों में पढ़ने की सामग्री और माहौल की कमी बड़ी चुनौती होती है। इन लाइब्रेरी के माध्यम से न केवल बच्चों और युवाओं को पढ़ने का अवसर मिला, बल्कि गांवों में एक सकारात्मक बौद्धिक माहौल भी विकसित हुआ। यह कदम दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मजबूत आधार बन सकता है।

कायाकल्प योजना – स्कूलों की बुनियादी संरचना को मजबूत करना:-अंजनेय कुमार सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया। “कायाकल्प” योजना के तहत उन्होंने स्कूलों की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) को पूरा कराने का अभियान चलाया। यह काम देखने में साधारण लग सकता है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत व्यापक है। बिना चारदीवारी के स्कूलों में सुरक्षा की कमी रहती है, बाहरी हस्तक्षेप होता है और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण नहीं बन पाता। चारदीवारी बनने के बाद स्कूलों में अनुशासन, सुरक्षा और उपस्थिति—तीनों में सुधार देखा गया। यह पहल इस बात को दर्शाती है कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था केवल किताबों से नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण से बनती है

ग्राम गजेटियर – गांवों के इतिहास और पहचान को दस्तावेज़ में लाने की पहल :-मुरादाबाद गजेटियर के बाद अब ग्राम गजेटियर पर काम शुरू करना उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। यह एक ऐसा प्रयास है जिसमें गांवों के इतिहास, सामाजिक संरचना, परंपराओं, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक पहचान को दस्तावेज़ी रूप दिया जा रहा है।  गांव अक्सर केवल प्रशासनिक आंकड़ों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन ग्राम गजेटियर के माध्यम से उन्हें एक पहचान और ऐतिहासिक संदर्भ दिया जा रहा है। यह भविष्य की योजनाओं, शोध और नीति निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

इस पहल से यह भी स्पष्ट होता है कि अंजनेय कुमार सिंह केवल वर्तमान को नहीं, बल्कि भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करते हैं।

एक प्रशासनिक सोच जो सीमाओं से आगे जाती है .इन नई पहलों को देखें तो यह साफ हो जाता है कि अंजनेय कुमार सिंह की कार्यशैली केवल “कानून लागू करने” तक सीमित नहीं है। वे प्रशासन को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने, उसे संवेदनशील बनाने और दीर्घकालिक बदलाव लाने की दिशा में काम करते हैं।

दृष्टिबाधित बच्चों के लिए लाइब्रेरी हो, गांव-गांव ज्ञान का विस्तार हो, पर्यावरण से जुड़ी पहल हो, स्कूलों की बुनियादी संरचना हो या गांवों के इतिहास को सहेजने का प्रयास—हर काम में एक स्पष्ट सोच दिखाई देती है।

यही वजह है कि उनका प्रशासनिक कार्यकाल केवल आदेशों और फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले बदलावों में नजर आता है।

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