कौन है हरीश राणा जिनके परिवार ने ही माँग ली उनके लिए इच्छा मृत्यु !

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ये तस्वीर बयां करती है इंसान की मजबूरी , इतनी मजबूरी की बेटे के लिए ही माँग ली इच्छा मृत्यु , सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा जो बाप अपने बेटे के पैर पर छोटा सा काँटा चुभने पर सहम जाता हो वो कैसे माँग सकता है अपने ही बेटे के लिए इच्छा मृत्यु . मगर इस दुनिया में एक शब्द है मजबूरी जी हाँ ऐसी मजबूरी की बेटे की तकलीफ़ कम करने के लिए उसे ज़िंदा नहीं मौत ज़्यादा ठीक लगी . ये कोई पिक्चर नहीं हकीकत है जिसे सुनकर आप सन रह जाएँगे कैसे एक परिवार ने माँगी अपने बेटे के लिए इच्छा मृत्यु : मामला ग़ाज़ियाबाद में रहने वाले हरीश राणा का है 2013 में चंडीगढ़ की एक यूनिवर्सिटी में सिविल इनिजीनियर की पढ़ाई करने गया , और अचानक एक दिन यूनिवर्सिटी की चौथी मंजिल से गिर गया जिसके कारण सिर पर गंभीर चोट लग गई इतनी गंभीर की हरीश कोमा में चला गया माँ बाप ने कई कोशिश की लेकिन हरीश की स्थिति जस की तस रही समय बढ़ने लगा हरीश धीरे धीरे सुन पढ़ने लगा उसकी सबसे वेंटिलेटर से चलने लगी और पिता का मकान तक इलाज कराने में बिक गया , जब इलाज में कोई फ़र्क़ ना पड़ा और हरीश की स्थिति कोमा से रति भर वापस नहीं आई तो उसकी तकलीफ़ देखते हुए पिता ने वो फ़ैसला किया जिसे लेने के लिए आपको भगवान होना पड़ेगा , पिता ने हाई कोर्ट से बेटे के लिए इक्छा मृत्यु माँगी जिसे हाई कोर्ट ने ख़ारिज किया जिसके बाद पिता सुप्रीम कोर्ट गया वहाँ भी पहली बार में सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया लेकिन दुबारा आने का द्वार खुला रखा , सोचो उस बाप पर क्या बीत रही होगी जिसका बेटा ना ज़िंदा रह सकता है ना मर सकता है , मजबूर पिता बेटे की दर्द भरी ज़िंदगी देख कर फिर फिर सुप्रीम कोर्ट के द्वार गया इस बार सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी ,वेंटिलेटर सपोर्ट हटाने की अनुमति फैसला सुनाते ही कोर्ट में एक चुपी सी पसर गई . अब वो दिन आया जब बेटे को लाइफ़ सपोर्ट से हटाना था , कुछ ब्रह्म कुमारी संस्था की बहने आई कमरे में कहाँ हरीश लेटा पड़ा था उन्होंने हरीश के माथे पर चंदन तिलक किया और आराम से उसके पास जाकर कहा सबसे माफ़ी माँग लो सबको माफ कर दो , और ये सुनते ही उस कमरे में लोगों की आँखें आँसुओं के साथ सूख गई . वेंटिलेटर सपोर्ट हठाने की प्रक्रिया शुरू हो गई , और हरीश आज़ादी की तरफ़ जाने लागा . आज पीछे रहता दिखाई दे रहा है मजबूर बाप .

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