CM ममता को बड़ा झटका, SIR की रफ्तार से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट!

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Written By Sanjay Singh

पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों का निपटारा 7 अप्रैल तक हो जाएगा। कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की तरफ से मिली रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह जानकारी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि गुरुवार, 2 अप्रैल से 19 अप्रैल ट्रिब्यूनल काम करना शुरू कर देंगे। यह ट्रिब्यूनल उन लोगों की अपील सुनेंगे, जो मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं।

ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIR से जुड़े दावों की सुनवाई न्यायिक अधिकारी (निचली अदालत के जज) कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट इस काम मे हुई प्रगति पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट लेता रहता है। सबसे नई रिपोर्ट में बताया गया है कि हर दिन लगभग 2 लाख दावों का निपटारा हो रहा है। कुल लगभग 60 लाख दावों में से 47 लाख पर निर्णय हो चुका है। 7 अप्रैल तक काम पूरा हो जाने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने दावों के निपटारे की रफ्तार पर संतोष जताया। बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। जजों ने उस बात पर नाराजगी जताई कि राजनीतिक दल उन्हें तरह-तरह के ज्ञापन देकर परेशान कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने इस बात का विरोध किया कि चुनाव आयोग अपीलेट ट्रिब्यूनल के सदस्यों को ट्रेनिंग दे रहा है। चीफ जस्टिस ने इस आपत्ति पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “ट्रिब्यूनल के सदस्यों को काम की प्रकृति से अवगत कराने का काम चुनाव आयोग नहीं करेगा तो कौन करेगा? ट्रिब्यूनल में हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और जज होंगे। क्या आपको लगता है कि वह प्रभावित हो जाएंगे?”

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हो रही हिंसा को लेकर याचिका दाखिल करने वाली संस्था सनातनी संसद की तरफ से कहा गया कि 2021 में नतीजों के बाद हिंसा करने वाले लोग ज़मानत पर बाहर हैं। यह पता नहीं है कि वह कहां हैं। आम लोगों की सुरक्षा ज़रूरी है। संस्था के लिए पेश वरिष्ठ वकील वी वी गिरी ने यह भी कहा कि SIR के दौरान हिंसा करने वाले ज़्यादातर लोगों की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। कोर्ट ने उन्हें सुनवाई का आश्वासन दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सभी पक्षों को याचिका की कॉपी सौंपे। 2021 की चुनावी हिंसा के मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। उसे भी पक्षकार बनाया जाए। याचिका पर विचार किया जाएगा।

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