कथावाचक अनिरुद्धाचार्य को जज की नसीहत, खुद को भगवान मत समझो!

written by Sanjay Singh
धार्मिक कथावाचक अनिरुद्धाचार्य को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जो व्यक्ति आध्यात्मिक प्रवचन देता है उसे आलोचना, प्रशंसा और अपनी प्रतिष्ठा जैसी बातों से ऊपर होना चाहिए। दरअसल अनिरुद्धाचार्य ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके कुछ वीडियो क्लिप्स वायरल किए जा रहे हैं जिनसे विवाद पैदा हो गया है और कई जगह उनके खिलाफ मामले भी दर्ज हो रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ वीडियो को एडिट करके या एआई की मदद से ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे वे कुछ विवादित बातें कह रहे हों।
दिल्ली हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस तुषार राव गेडेला ने सबसे पहले यह सवाल उठाया कि अनिरुद्धाचार्य ने दिल्ली हाईकोर्ट में ही याचिका क्यों दायर की जबकि वे वृंदावन में रहते हैं। जज ने कहा कि इंटरनेट पर मौजूद सामग्री तो दुनिया भर में कहीं भी देखी जा सकती है। जज ने हल्के अंदाज़ में कहा यह सामग्री तो मंगल या बृहस्पति ग्रह पर भी उपलब्ध हो सकती है। सवाल यह है कि लोग इसे कहाँ देख रहे हैं…जब वकील ने दलील दी कि अनिरुद्धाचार्य के अधिकतर दर्शक दिल्ली में हैंतो जज ने कहा कि देश के किसी भी हाईकोर्ट या जिला अदालत में ऐसी याचिका दायर की जा सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कलकत्ता हाईकोर्ट या इलाहाबाद हाईकोर्ट कोई आदेश देते तो क्या गूगल या अन्य कंपनियां उसे नहीं मानतीं
जस्टिस गेडेला ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि हर कोई ऐसी याचिकाओं के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ही क्यों आता है। उन्होंने कहा कि देश की बाकी अदालतें भी ऐसे मामलों में आदेश देने में सक्षम हैं। जब वकील ने कहा कि अनिरुद्धाचार्य का कुछ बिजनेस भी दिल्ली में हैं तो जज ने मुस्कराते हुए कहा अच्छा आपके बिजनेस भी हैं… सुनवाई के दौरान जज ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जो व्यक्ति आध्यात्मिक दर्शन और जीवन की सीख देता है, उसे आलोचना से घबराना नहीं चाहिए। कोर्ट ने कहा आप तो लोगों को जीवन का दर्शन सिखाते हैं। आपको आलोचना, प्रशंसा और पहचान से ऊपर होना चाहिए। आप अपनी प्रतिष्ठा से जुड़े नहीं हो सकते वरना यह आपके उपदेशों के खिलाफ होगा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि आदि शंकराचार्य के विचारों से भी लोग असहमत होते थे लेकिन उन्होंने कभी मानहानि के मुकदमे नहीं किए। वे लोगों से बहस करते थे और तर्क से अपने विचार रखते थे।
हालांकि सुनवाई के दौरान अनिरुद्धाचार्य के वकील ने यह भी कहा कि कुछ वीडियो डीपफेक तकनीक से बनाए गए हैं और उन्हें ऐसे बयान देते हुए दिखाया जा रहा है जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं। इस पर कोर्ट ने माना कि अगर किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए फर्जी वीडियो बनाए जा रहे हैं तो यह गंभीर मामला है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अनिरुद्धाचार्य के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश जारी किया है। यानी जब तक मामला पूरी तरह से तय नहीं हो जाता तब तक उनकी छवि या नाम का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और सामग्री के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
