राम मंदिर ट्रस्ट को देना होगा जवाब !

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Written by Shikha

दिल्ली

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। नोटिस में ट्रस्ट से पिछले पांच वर्षों के दान, खर्च, जमीन खरीद, बैंक खातों और विदेशी चंदे का पूरा विवरण मांगा गया है। अधिवक्ता का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन का हिसाब पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक होना चाहिए।

राजद सांसद सुधाकर सिंह की ओर से भेजे गए इस नोटिस में वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की वित्तीय जानकारी मांगी गई है। साथ ही ट्रस्ट की ऑडिटेड बैलेंस शीट, आय-व्यय का ब्यौरा और विभिन्न मदों में हुए खर्च का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत का कहना है कि जब देश और दुनिया से लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए दान दिया है, तब उस धन के उपयोग को लेकर किसी भी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए। उनका कहना है कि पारदर्शिता से ही जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

नोटिस में ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। सवाल उठाया गया है कि किन क्षेत्रों में जमीन खरीदी गई, कितनी कीमत पर खरीदी गई और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। अधिवक्ता का कहना है कि यह जानकारी सार्वजनिक हित से जुड़ी हुई है।

इतना ही नहीं, ट्रस्ट के बैंक खातों और उनमें जमा दान राशि के उपयोग का ब्यौरा भी मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि श्रद्धालुओं का योगदान केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है।

विदेशी चंदे को लेकर भी जानकारी मांगी गई है। एफसीआरए के तहत प्राप्त धनराशि, उसके स्रोत और उसके उपयोग से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अधिवक्ता का कहना है कि सभी वित्तीय जानकारियां स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।

नोटिस में ट्रस्ट को तीन दिनों के भीतर जवाब देने का समय दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

सत्यम सिंह राजपूत का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना है। उनका मानना है कि आस्था से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता सबसे बड़ी ताकत होती है।

नोटिस में मद्रास हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले का भी उल्लेख किया गया है। इसी के आधार पर वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने की मांग को उचित बताया गया है। अब सभी की नजर ट्रस्ट की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती दौर में है। आने वाले दिनों में ट्रस्ट का जवाब और आगे की कार्रवाई तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में बढ़ता है। लेकिन इतना जरूर है कि इस नोटिस ने राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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